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आधुनिक खेती के शौक में बेच डाली अपनी कंपनी, अब बिना मिट्टी की खेती से कमा रहे हैं लाखों रुपये

मौजूदा समय के हालात कुछ ऐसे हैं कि किसान खेती को छोड़ किसी दूसरे सम्भावना की तलाश कर रहे हैं। क्योंकि परम्परागत तरीके से खेती करने पर किसानों को मन मुताबिक लाभ नहीं मिल पा रहा। कभी मौसम की मार, कभी कम उपज तो कभी सही दाम न मिलने से किसान परेशान रहता है। वहीं दूसरी तरफ बहुत सारे ऐसे फल-सब्ज़ियाँ हैं जो विदेशों से आयात किये जाते हैं और ग्राहक उसे अच्छे-ख़ासे दामों में खरीदते भी हैं। अच्छी ख़ासी डिमांड के बावजूद ये विदेशी सब्ज़ियाँ हर जगह नहीं उगाई जा सकती, क्योंकि इसे एक विशेष जलवायु और वातावरण की आवश्यकता होती है। यहाँ तक की यह हर प्रकार की मिट्टी में भी पैदा नहीं हो सकते। पर कुछ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर अब नई पीढ़ी के किसान, इन फल सब्जियों को देश में ही उगा रहे हैं। जिससे उन्हें अच्छा खास मुनाफ़ा भी मिल रहा है।
आज हम एक ऐसे ही युवा किसान के बारे में आपको बताने जा रहे हैं जो ‘स्वॉयललेस कल्टीवेशन’ विधि यानि बिना मिट्टी के द्वारा इन पौधों को उगा रहा है और लाखों की कमाई कर रहा है।

इनका नाम है अजय नाइक। अजय मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले हैं। लेकिन अजय काफी समय तक वे गोवा में रहे और फ़िलहाल वे बेंगलुरु में है। अजय ने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। पढ़ाई खत्म होने के बाद उन्होंने गोवा में एक सॉफ्टवेयर कंपनी को ज्वाइन कर लिया। पर कुछ समय काम करने के बाद अजय ने खुद का कुछ करने का सोचा और 2011 में उन्होंने अपनी सॉफ्टवेयर कंपनी की नौकरी को छोड़ दिया। उसके बाद अजय ने मोबाइल ऐप्लिकेशन बनाने वाली अपनी खुद की ही एक कंपनी स्थापित कर दी। अजय का यह स्टार्टअप चल निकला और उससे उन्हें लाखों की कमाई होने लगी।

पर अजय को तो कुछ और ही करना था। एक बार अजय को ‘स्वॉयललेस कल्टीवेशन’ के बारे में पता चला जिसे वैज्ञानिक तौर ‘हाइड्रोपोनिक्स’ और सामान्य तौर बिना मिट्टी की खेती या ‘जलकृषि’ भी कहा जाता है। इसमें मिट्टी का प्रयोग नहीं होता है, इसे केवल पानी में या लकड़ी का बुरादा, बालू अथवा कंकड़ों को पानी में डाली जाता है। सामान्यतया पेड़-पौधे अपने आवश्यक पोषक तत्व ज़मीन से लेते हैं, लेकिन हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में पौधों के लिये आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने के लिये पौधों में एक विशेष प्रकार का घोल डाला जाता है। इस घोल में पौधों की बढ़वार के लिये आवश्यक खनिज एवं पोषक तत्व मिलाए जाते हैं। पानी, कंकड़ों या बालू आदि में उगाए जाने वाले पौधों में इस घोल की महीने में दो-एक बार केवल कुछ बूँदें ही डाली जाती है। इस घोल में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, मैग्नीशियम, कैल्शियम, सल्फर, जिंक और आयरन आदि तत्वों को एक खास अनुपात में मिलाया जाता है, ताकि पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते रहे।

अजय को इस चीज़ नें इतना प्रभावित किया की वे इस तकनीक को समझने के इच्छुक हो गए। उन्हें पता चला कि इस तकनीक के माध्यम में हम विदेशी फल सब्जियों को यहीं अपने देश में पैदा कर सकते हैं यानि हमें बाहर से उसे आयात नहीं करना पड़ेगा। जिससे ग्राहकों तक कम दाम में ही बिलकुल ताजी फल-सब्जी हम पहुंचा सकते हैं। अजय को इस बात नें बहुत प्रभावित किया और उन्होंने इसे अपनाने का मन बना लिया। इसके लिए अजय ने लाखों का मुनाफ़ा देने वाली अपनी ऐप कंपनी एक जर्मनी की फर्म को बेच दिया। अजय ने इन्हीं पैसों से अपना खुद का ‘हाइड्रोपोनिक्स’ फार्म खोलने का मन बनाया।

वर्ष 2016 में उन्होंने अपने 6 दोस्तों के साथ गोवा के करासवाडा में अपना फार्म शुरू किया। यहाँ उन्होंने सफलता पूर्वक स्वॉयललेस कल्टीवेशन’ यानि ‘हाइड्रोपोनिक्स’ तकनीक से फल-सब्जियों को उगाना शुरू किया। इस दौरान अजय ने इस तकनीक को बारीकी से समझा। वहां उन्होंने विदेशी सलाद में उपयोग होने वाले पत्ते जैसे लेट्स, सेलरी आदि उगाएं। जिससे उन्हें अच्छा खास मुनाफ़ा भी हुआ। इस सफलता को देखते हुए अजय ने इसका विस्तार करने का मन बनाया और विभिन्न प्रकार से विदेशी फलों के पैदावार की भी योजना बनाई। अजय ने स्टार्टअप अपनी दूसरी पारी की शुरुआत की और ‘लेटसेट्र’ नाम से बेंगलुरु में एक फार्म की शुरुआत की।

अजय अब अपने फार्म में लेट्स, सेलरी, स्पिनिच आदि के अलावा शिमला मिर्च और स्ट्राबेरी भी उगा रहे है। उनके द्वारा उगाई गयी फल-सब्जियों को बाज़ारों में बेचा भी जा रहा है, सब्जियां और फलों की गुणवत्ता भी अधिक होने के कारण उनको मुनाफ़ा भी अच्छा मिल रहा है।

अजय आज उन लोगों के लिए एक उदाहरण हैं जो खेती को मुनाफ़े का सौदा नहीं समझते। अगर सूझ-बूझ और आधुनिक तकनीक अपना कर हम खेती करे तो निश्चित रूप से हमें सफलता मिल सकती है।

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