,

शिक्षा का बीज बो रही हैं अफसाना, नौकरी छोड़ बस्ती के बच्चों को दिला रहीं अनोखी ‘पहचान’

क्या किसी को कोई चीज इतनी झकझोर सकती है कि वो अपना मकसद, अपनी मंजिल ही बदल डाले? तो इसका जवाब ‘हाँ’ है। इसकी जीती जागती उदाहरण हैं बिहार की अफसाना। अफसाना प्रवीण अच्छे पैकेज की नौकरी को अलविदा कह मुंबई में पहचान नाम से स्ट्रीट स्कूल चलाती हैं जहाँ वर्तमान में 800 बच्चों का भविष्य निर्माण किया जा रहा है।

ऐसे हुई शुरुआत

16 दिसम्बर 2012 की वो काली रात शायद ही कोई भूल पाया हो, लेकिन आज इतने साल बाद सब अपने कामों में व्यस्त है। लेकिन अफसाना के लिए आगे बढ़ना इतना आसान नहीं था। उसे बार-बार निर्भया की चीखें सुनाई देती थी। उसे देश की तमाम लड़कियों की चिंता सताने लगी क्योंकि उन देश की उन लड़कियों में उसकी तीन बहनें भी शामिल थीं। साल 2000 में अफसाना पढ़ाई और नौकरी की तलाश में बिहार से दिल्ली आ गयीं, लेकिन दिल्ली उन्हें रास नहीं आई। छेड़खानी, बदतमीजी से वो परेशान रहती थीं, ख़ैर उन्होंने सब झेला और 2007 में शादी कर मुंबई में सेटल हो गयीं।

दिल्ली से बीए की पढ़ाई कर चुकीं अफसाना मुंबई में अच्छे पैकेज के साथ मर्चेनडाइजर की जॉब करने लगीं। पति मीडिया में हैं, सब कुछ अच्छा चल रहा था, फिर एक हादसे ने उनकी जिंदगी पलट दी। वो हादसा कोई और नहीं बल्कि दिल्ली में 16 दिसम्बर को हुआ निर्भया काण्ड ही था। उस हादसे के बाद अफसाना को अपनी तीन बहनों की चिंता सताने लगी, जो दिल्ली में ही रहा करती थीं। अफसाना रोज परेशान रहती थीं और एक दिन उन्होंने कुछ करने का सोचा। उन्हें साथ मिला उनके पति का, जिन्होंने नया रास्ता चुनने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया और अफसाना चल पड़ी दूसरों की जिन्दगी संवारने।

उसने अपनी नौकरी को अलविदा कहा और बिहार, दिल्ली, यूपी जैसे राज्यों का दौरा किया और रेप, बलात्कार, छेड़खानी जैसे अपराधों का कारण ढूँढने लगी। उन्हें अहसास हुआ कि इसका कारण कुछ और नहीं बल्कि शिक्षा का अभाव है। ये वही समय था, जब अफसाना ने अपनी जिन्दगी का मकसद बदला और हर किसी में शिक्षा का दीप जलाने का सोचा।

मुंबई में शुरू किया ‘पहचान’

2014 में वो वापस मुंबई आयीं और झुग्ग्यों के बच्चों को पढ़ाने लगीं। इस मिशन को उन्होंने ‘पहचान’ नाम दिया। इस वक़्त ‘पहचान, द स्ट्रीट स्कूल’ दिल्ली और मुंबई की झुग्गियों में दो जगह चलता है और बिहार में इसके 5 केंद्र हैं। झुग्गियों के बच्चों को बेसिक ज्ञान देकर उन्हें स्कूल में दाखिला दिलवाने के लायक बनाती हैं। इस वक़्त उनके मिशन से लगभग 800 बच्चे जुड़े हैं, जिनमें से कई का एडमिशन प्राइवेट स्कूलों में हो चुका है। पहचान स्ट्रीट स्कूल मुंबई में बालाजी थिएटर के पीछे और नवी मुंबई में सोमवार से शुक्रवार चलता है।

अफसाना का मानना है बच्चों में बचपन से शिक्षा का बीज बोना जरूरी है ताकि वो गलत करने से पहले 100 बार सोचे, उनमें सही गलत की पहचाने करने की क्षमता हो। अफसाना के इस मिशन से लगभग 50 वॉलंटियर भी जुड़े हैं, जो उनके साथ मिलकर इन बच्चों को पढ़ाते हैं। इसके अलावा कई ऐसे लोग हैं जो बच्चों को पढ़ने के लिए किताबें और स्टेशनरी दे जाते हैं।

केनफ़ोलिओज़ से बातचीत के दौरान अफसाना ने बताया कि उनका मकसद है कि हर बच्चा शिक्षित हो ताकि देश में हो रहे अपराधों पर लगाम लग सके और फिर निर्भया जैसी कोई अमानवीय घटना घटित न हो।

अगर हर कोई अफसाना की तरह सोचने लगेगा तो देश में कोई भी अनपढ़ नहीं बचेगा और अपना भारत तेजी से आगे बढ़ेगा क्योंकि पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया।

आप अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं और इस पोस्ट को शेयर अवश्य करें

आपका कमेंट लिखें