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गंभीर बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद यह व्यक्ति 30 देशो में फैली 400 कंपनियों का कर रहे हैं नेतृत्व

अगर हम किसी व्यक्ति की ECG रिकॉर्डिंग देखे तो उसमें हमें काफ़ी उतार-चढ़ाव वाली लाइन्स दिखाई देती है। मॉनीटर पर दिखने वाले इन पैटर्न्स से मनुष्य की जीवन यात्रा को समझने का इससे अच्छा रूपक कोई नहीं हो सकता। हम अपनी ज़िन्दगी में बहुत से उतार-चढ़ाव से गुज़रते हैं। कभी हम बहुत ख़ुश होते हैं तो कभी बहुत दुःखी, परन्तु मानव जीवन लगातार जीतने को तैयार रहता है। 67 वर्षीय सर रिचर्ड ब्रांसन, जो एक बिज़नेस मैग्नेट, इन्वेस्टर और लोक-हितैषी हैं, की जीवन यात्रा भी कुछ ऐसी ही है।

रिचर्ड का जन्म एक धनी परिवार में हुआ। उनके दादा एक जाने-माने जज थे और उनके पिता एक सफल बैरिस्टर। उनकी माँ इंग्लैंड की पहली महिला फ्लाइट अटेंडेंट थीं। परन्तु फिर भी रिचर्ड का बचपन आसान नहीं था। उन्हें मायोपिया और डिस्लेक्सिया नामक बीमारियां थी जिसमें व्यक्ति को सिखने और पढ़ने की समस्या आ जाती है। इसमें अक्षरों के लिखित रूप और उच्चारण के संबंध की पहचान करने की दिक्कत के कारण अक्षरों को पढ़ने में समस्या होती है। इसके बावजूद उनके माता-पिता ने अपना सर्वश्रेष्ठ देकर उन्हें दूसरे बच्चों की तरह अच्छे से पाला।

परिवार की परंपरा के अनुसार रिचर्ड को बर्कशायर के बोर्डिंग स्कूल स्कैटक्लिफ स्कूल में डाल दिया गया। रिचर्ड को यह पसंद नहीं था क्योंकि उन्हें क्लास में हमेशा मुसीबत में रहना पड़ता और संघर्ष करना पड़ता था। 8 वर्ष की उम्र में वे पढ़ नहीं पाते थे और ब्लैक बोर्ड पर अक्षर और नंबर नहीं लिख पाते थे। शिक्षा उनके लिए किसी यातना से कम नहीं थी और घटिया प्रदर्शन पर उन्हें मार भी खानी पड़ती थी।

अपने पिता की तरह रिचर्ड स्पोर्ट्स में काफ़ी अच्छे थे। रिचर्ड फुटबॉल, रग्बी  क्रिकेट टीम में कप्तान थे। वे हमेशा रेस जीतते थे और लॉन्ग जंप में नए-नए रिकार्ड्स बनाते थे। उनकी ख़ुशनुमा जिंदगी पर तब विराम लग गया जब उन्हें फुटबॉल खेलते समय चोट लग गई। डॉक्टर ने उन्हें लंबे समय तक फुटबॉल खेलने से मना कर दिया।

1963 में उन्हें स्टोवे स्कूल में डाल दिया गया जहाँ वे जोनाथन हॉलैंड-जेम्स से मिले, जिन्होंने रिचर्ड में जर्नलिज्म और न्यूज़ पेपर के जूनून को विकसित करने में मदद किया। दोनों  ने मिलकर स्टोवे स्कूल के अनुपयोगी नियमों को स्थगित करवाया।

उन दोनों ने मिलकर एक मैगज़ीन शुरू की जिसका नाम स्टूडेंट था और जल्द ही सभी सम्भव कंट्रीब्युटर्स और ऐडवर्टाइज़र्स को शामिल कर लिया गया । रिचर्ड ने स्टूडेंट के प्रचार के लिए सैकड़ों लेटर्स और कॉल किये। जिसके फलस्वरूप उन्हें स्टूडेंट की  पहली कॉपी और विज्ञापन का 250 डॉलर का चेक मिला। उन्हें जेराल्ड स्कॉर्फ, जो एक प्रसिद्ध इंग्लिश कार्टूनिस्ट हैं, ने संडे टाइम्स, द न्यू यॉर्कर,और पिंक फ़्लॉयड्स द वॉल में कार्टून्स बनाने और इंटरव्यू लेने का काम दिया।

रिचर्ड को लगने लगा था कि पढ़ाई से उन्हें कुछ नहीं मिलेगा और इसलिए उन्होंने 17 वर्ष की आयु में स्टोवे स्कूल छोड़ दिया।

उनके हेडमास्टर ने उनके लिए कहा,“बधाई ब्रांसन। मैं यह भविष्यवाणी करता हूँ कि तुम या तो सारी जिंदगी जेल में रहोगे या फिर एक अरबपति बनोगे।”

स्टूडेंट मैगज़ीन एक तरह से युवा लोगों के लिए एक प्लेटफार्म बन गया जिसमें वे अपनी बात रख सकते थे। पाठको को इस मैगज़ीन से बहुत से टॉपिक्स जिनमें म्यूजिक, पॉप कल्चर, वियतनाम और बिआफ्रा वॉर और दूसरे बहुत से मामलों की जानकारी मिल जाती थी। मैगज़ीन में बड़े-बड़े लोगों जैसे माइक जैगर और जॉन लेनॉन के इंटरव्यू लिए गए। इस दौरान उन्होंने कुछ खास रिकार्ड्स (म्यूजिक सीडी) के विज्ञापन इस मैगज़ीन में छापे जिससे उन्हें बहुत लाभ मिला। उनके रिकार्ड्स की बिक्री बहुत बढ़ गई और उसकी डिमांड भी बढ़ती चली गई और वे रातों रात बिज़नेस मैन बन गए।

रिचर्ड ने इस मैगज़ीन के जरिए सस्ते मेल-आर्डर रिकार्ड्स को बेचने का सोचा और इसके लिए उन्होंने एक बिज़नेस शुरू किया जिसका नाम वर्जिन रखा क्योंकि वे इस बिज़नेस में बिल्कुल नए थे। 1970 में स्टूडेंट मैगज़ीन ने दम तोड़ दिया और वर्जिन मेल आर्डर ने उसकी जगह ले ली। 1971 में पोस्ट ऑफिस कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी जिससे वर्जिन मेल आर्डर बिज़नेस लगभग ख़त्म हो गया। अपनी कंपनी बचाने के लिए उन्होंने वर्जिन नाम की एक शॉप खोल ली। उसके बाद वे वर्जिन रिकार्ड्स बनाने लगे जो प्रतिभाशाली म्यूजिक कलाकार रिकॉर्ड करते थे। वर्जिन रिकार्ड्स बाद में दुनिया का सबसे बड़ा स्वतंत्र रिकॉर्ड लेबल बन गया।

रिचर्ड केवल म्यूजिक बिज़नेस में रहना नहीं चाहते थे। 1983 तक उनकी 50 से अधिक कम्पनीज के अपने साम्राज्य से अधिक 17 मिलियन डॉलर तक संयुक्त बिक्री हुई। 1984 में उन्होंने अपनी खुद की एयरलाइन्स शुरू की जिसका नाम वर्जिन अटलांटिक था। परन्तु 1992 में उनका एयरलाइन बिज़नेस दिवालिया घोषित हो गया। उन्होंने वर्जिन रिकार्ड्स को बेच कर अपने एयरलाइन्स बिज़नेस को बचाया। ब्रांसन यह लड़ी जीत चुके थे परन्तु अपनी पसंदीदा म्यूजिक कंपनी से हाथ धो बैठे।

1999 में रिचर्ड ब्रांसन को इंटरप्रेन्योरशिप की सेवा के लिए नाइट की उपाधि से सम्मानित किया गया। 2002 में उनका नाम “100 ग्रेटेस्ट ब्रिटंस” में शामिल हुआ और 2017 में फ़ोर्ब्स की लिस्ट में ब्रांसन के साम्राज्य की लगभग कीमत 18,000 करोड़ आंकी गई।

आज रिचर्ड 30 देशों में फैले अपनी 400 कंपनियों को कंट्रोल कर रहे हैं। उन्होंने हमेशा खुद को एक कदम और आगे जाने की चुनौती दी है। उनका मानना है कि वे केवल बड़े उद्यमों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करते बल्कि अपने काम को और बेहतर बना सकते हैं।

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