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चार दोस्त, 40 गायें और एक शानदार बिज़नेस आइडिया, कुछ ही वर्षों में होने लगा 90 करोड़ का टर्नओवर

एक जमी-जमाई नौकरी आपको महीने की बंधी-बंधाई तनख्वाह, रहने के लिए छत और पेट भर खाना उपलब्ध तो करा सकती है परन्तु आत्मा की संतुष्टि शायद ही दे पाए। जीवन की समरस सी गति आपको सब कुछ दे सकती है परन्तु यह किसी के विवेक को चुनौती नहीं देती और आपको एक नीरस जीवन जीने के लिए छोड़ जाती है ।

एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के बेटे अभिनव शाह जब अपने नीरस जीवन से हताश हो गए तब उन्होंने इंटरप्रेन्योर की दुनिया में कदम रखने का निश्चय कर लिया। पेशे से सीए अभिनव, नौ से पांच की नौकरी से तंग आ चुके थे और उससे दूर जाना चाहते थे। जब रांची में जन्मे इस लड़के ने अपना खुद का कुछ करने का सोचा तब उनके दूसरे पार्टनर उनसे जुड़ने लगे। उन्होंने 2012 में एक डेयरी फार्म की शुरूआत की। 2014 में उन्होंने ऑसम डेयरीज के नाम से अपने कारोबार का रजिस्टर कराया। अभिनव अपने अन्य साथी अभिषेक राज, हर्ष ठक्कर और राकेश शर्मा के साथ बिज़नेस को चला रहे हैं।

ऑसम डेयरीज के सहसंस्थापक अभिषेक ने ही डेरी शुरू करने के बारे में सोचा। लक्सम्बर्ग में काम करते हुए अभिषेक अन्य देशों के डेरी व्यवसाय के कार्यों से प्रेरित थे। अपनी आलीशान नौकरी को छोड़कर उन्होंने भारत का रुख किया और झारखण्ड में अपने बिज़नेस की शुरूआत की।

इस आइडिया से प्रेरित होकर अभिनव ने अपनी नौ साल की नौकरी छोड़ दी और डेयरी बिज़नेस की स्थापना की। इस बिज़नेस की रूपरेखा को समझने के लिए उन्होंने कानपुर से कमर्शियल डेयरी फार्मिंग का कोर्स किया। वर्कशॉप के तुरंत बाद अभिनव पंजाब गए और वहां से 35 लाख रुपये की 40 गायें खरीदी। सभी संस्थापकों ने इस बिज़नेस में बराबर का योगदान दिया है और एक करोड़ के शुरूआती फण्ड से इसकी आधारशिला रखी।

उसके बाद एक कड़वी चुनौती उनके सामने आई वह यह कि एक महीने के भीतर ही उनकी 26 गायें संक्रमित होकर मर गई। अनुभव की कमी की वजह से उनके ग्रुप को यह महंगा भुगतान सहना पड़ा।

उन सभी ने तय किया कि वे इस फील्ड के विशेषज्ञ से बात करेंगे। उन्होंने अपना साहस बटोरा और 50 लाख रुपये में 100 होल्सटीन फ्रीजियन गायें ख़रीदी। इस तरह उनका निवेश करीब 1.5 करोड़ का हो गया। यह बड़ा रिस्क था परन्तु उनके प्रॉडक्ट की मांग बढ़ने की वजह से छह महीने के भीतर ही उन्हें उसका प्रतिफल मिल गया।

2013 में उन सभी ने अपना खुद का डेयरी प्लांट खोलने का निश्चय किया। इसके लिए उन्हें 20 करोड़ रुपये की जरूरत थी। उनके सामने यह एक बड़ी चुनौती थी परन्तु बहुत दिनों के कठिन परिश्रम के बाद उन्हें एक राष्ट्रीय बैंक से सात करोड़ रूपये लोन मिल गया।

डेयरी फार्म का कंस्ट्रक्शन का काम शुरू हो गया और लगभग एक साल बाद यह बनकर पूरा हो गया। आख़िर में 2015 में ऑसम डेयरीज नाम के प्लांट ने काम करना शुरू किया।

शुरूआती कुछ दिनों में बिज़नेस ने अच्छा प्रदर्शन किया परन्तु जैसे-जैसे बिज़नेस बढ़ने लगा ऑसम डेयरीज को स्थानीय गुंडों के विरोध का सामना करना पड़ा। यह विरोध इसलिए था क्योंकि इस क्षेत्र में उनका शुरू से एकाधिकार था और यह विकसित प्लांट किसी से भी प्रतिस्पर्धा नहीं करना चाहता था। परन्तु अभिनव और उसकी टीम भी मैदान पर उतर आये जिससे गुंडों को पीछे हटना पड़ा।

जैसे-जैसे उनकी यह इंटरप्रेन्योर यात्रा आगे बढ़ती गई वैसे-वैसे वे बिज़नेस की बारीकियां सीखते गए। ऑसम डेयरीज अब एक जाना-माना ब्रांड बन गया था और राज्य के हर हिस्से के ग्राहकों को वे सेवा दे रहे हैं। शुरूआती सफलता के बाद उन्होंने इसकी श्रृंखला दूसरे राज्यों में भी फैलाने का फैसला किया।

केनफ़ोलिओज़ को दिए इंटरव्यू में अभिनव कहते हैं “हमने इंटरप्रेन्योर यात्रा के हर लम्हे का आंनद लिया है और हमने उत्कृष्ट क्वालिटी के डेयरी प्रोडक्ट्स झारखण्ड के लगभग एक लाख लोगों तक पहुंचाया है।” ऑसम डेयरीज 15,000 किसानों से दूध एकत्रित करते हैं और डेयरी इकोसिस्टम को सुधारने का काम भी कर रहे हैं जिसमें पशुओं को संतुलित भोजन, पशु चिकित्सा देखभाल, डीवॉर्मिंग, टीकाकरण और पशुओं का बीमा शामिल है।

आज इस कंपनी में 180 कर्मचारी हैं। इनका पिछले साल का टर्न-ओवर 90 करोड़ तक पहुंच गया है। इनके झारखंड में दो प्लांट हैं और उनकी क्षमता दो लाख लीटर्स प्रति दिन है और वे 350 गाँवों से दूध एकत्रित करते हैं।

ऑसम डेयरीज अपनी उम्मीद से भी अधिक वृद्धि कर रहा है और अपने पैर दूसरे शहरों और राज्यों में भी पसार रहा है। ऑसम डेयरीज को 2013 में झारखंड सरकार की तरफ से बेस्ट यंग डेयरी अवार्ड से नवाज़ा गया। पाठकों को मैसेज देते हुए वे कहते हैंआगे बढ़ते रहो और अपने स्वाभाविकता के साथ चलो, शुरूआत में यात्रा कठिन लगेगी परन्तु अगर आप लगातार सफलता की दिशा में चलते रहे तो ख्याति खुद ब खुद आपके रास्ते में आ ही जाएगी।”

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