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311 रुपये से शुरुआत कर 650 करोड़ का बिज़नेस एम्पायर बनाने वाले 27 वर्षीय युवा उद्यमी

सफलता किसी को भी आसानी से नहीं मिलती। कठिन मेहनत, कभी न हार मानने वाले ज़ज्बे और सही रणनीति का पालन करने से ही सफलता का स्वाद चखा जा सकता है। हम में से अधिकांश यह नहीं समझा पाते कि सफलता की कोई परिभाषा नहीं है और इसे सामाजिक मानदंडों पर नहीं मापा जा सकता। यदि हम सफलता के कारको को मापने की कोशिश करते हैं, तो यह 10 प्रतिशत भाग्य और 90 प्रतिशत कड़ी मेहनत का प्रतिफल है।

मुंबई के उशिक महेश गाला की कुछ ऐसी ही कहानी है। जिन्होंने अपने जीवन के संघर्षों का डट कर सामना किया और परिवार के बीमार व्यवसाय को एक रॉकेट की तरह ऊंची उड़ान भरने के काबिल बनाया। एक व्यवसायी पारिवारिक पृष्ठभूमि वाले उशिक ने देखा था कि व्यापार कैसे काम करता है; हालांकि, उन्हें इसके रणनीति के मॉडल में अपने हाथों को आजमाने का मौका तब मिल पाया जब उनके पिता ने इसके लिए उन्हें उपयुक्त पाया।

उशिक कॉलेज के दौरान ही अपने पिता के वस्त्र व्यवसाय की बारीकियों को समझ लिया था। लेकिन यह 2006 से 2008 तक की मंदी का शुरुआती वक्त था, जो उनके परिवार के लिए वास्तविक रुप में एक कठिन दौर साबित हुआ। इस अवधि का प्रभाव इतना तीव्र था कि उसने व्यापार को धरातल पर पहुंचा दिया और उसे बंद करना पड़ा। परिवार में कोई भी उस बिजनेस मॉडल की कोशिश करने के लिए तैयार नहीं था।

जब उशिक ने 2010 में कारोबार जगत में प्रवेश किया, तो उनकी जेब में केवल 311 रुपये थे। अब भी वही उनकी वित्तीय आवश्यकता पूरी कर रहा था। ऐसे में उन्होंने फैसला किया कि जो भी हो सकता हो वह व्यापार को डूबने नहीं दे सकते। लेकिन एक योजना बनाना एक बात थी, और योजनाओं का क्रियान्वयन करना एक दूसरी बात थी। पूँजी सीमित थी और बाजार टेढ़े-मेढ़े घुमावदार चरणों से गुजर रहा था जहां किसी भी प्रकार का निवेश करना, अपनी आजीविका को जोखिम में डालने के समान हो सकता था।

प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद उशिक अपनी दूरदर्शिता से व्यापार को नई ऊंचाई तक बढ़ाना चाहते थे, जिससे व्यापार संचालित करने के तरीकों में बदलाव लाना था। अतः 2012 में, मंदी के खत्म होने के बाद, उन्होंने दुल्हन के परिधानों के साथ बाजार में फिर से प्रवेश करने का फैसला किया।

“यह एक निर्मम प्रतियोगिता से भरा व्यापार साबित हुआ क्योंकि बाजार में कई कठिन खिलाड़ी थे। हर कोई इस मॉडल की कोशिश कर रहा था, इस प्रकार यह एक कड़ा संघर्ष बन गया। पूरे बिजनेस मॉडल को बदलने के लिए, मुझे यह जोखिम उठाना पड़ा क्योंकि यदि मैं असफल हो जाता, तो मुझे मेरे परिवार को देने के लिए कुछ नहीं रहता। मैंने अपनी आँखें बंद कर ली और फैसला कर लिया। हम पहले केवल खुदरा बिक्री में थे, इसलिए मैंने एक खाका डिजाइन किया जो व्यवसाय को व्यापार करने के साथ ही विनिर्माण के क्षेत्र में भी बढ़ाया, “उन्होंने केनफ़ोलिओज़ को एक साक्षात्कार में बताया।

उन्होंने बाजार पर अपनी एक पकड़ महसूस की। साल 2014 में उन्होंने ‘सुमाया लाइफस्टाइल’ नाम के तहत एक नया उद्यम शुरू करने का फैसला किया। वास्तव में, बदलते बाजार की गति इतनी तेज़ थी कि वह मुश्किल से इसके साथ तालमेल कर पा रहे थे। इस यात्रा में उन्होंने एक बात यह सीखी थी कि शिकायत करने के लिए कोई जगह नहीं है। इसमें या तो वह बन सकते हैं या बिखर सकते हैं इसलिए उन्होंने पहले विकल्प को चुना और सफलता की दिशा में व्यवसाय पर एक कड़ा जोर लगाया।

11 अगस्त 2011 में सुयामा लाइफस्टाइल की आधारशिला अस्तित्व में आईं लेकिन 2014 में 2 लाख रुपए के निजी पूँजी निवेश के साथ आधिकारिक सूत्रपात स्वीकार किया गया। 2012 से 2014 की अवधि में उशिक ने दुल्हन परिधानों की बिक्री की। 2014 में यह बदल गया जब उन्होंने नई मांग के प्रवाह के अनुसार महिलाओं के अनौपचारिक पहनावे की ओर रुख़ किया। यह व्यवसाय उनके लिए भाग्यशाली साबित हुआ और उन्होंने सिर्फ तीन-चार साल के क्रियान्वयन में ही भारी-भरकमपैसे कमाए।

मुंबई में एक विनिर्माण इकाई के साथ, उन्होंने किफायती और गुणवत्ता वाले वस्त्रों पर काम किया और भारत और विदेशों में उनका विपणन किया। ‘सुुमाया लाइफस्टाइल’ ने गति पकड़ा और आज यह भारत में सबसे बड़ा परिधान निर्माता है। 2017 में इसका बैलेंस शीट 214 करोड़ रुपये पर बंद हुआ। समय की इस अल्पावधि में अब कर्मचारियों की संख्या का आकार 3,000 तक बढ़ गया।

सुयामा लाइफस्टाइल की सफलता के बाद उन्होंने कपड़ा निर्माण कंपनी ‘सुमाया फैब्रिक’ के साथ शुरुआत की जो ‘सुयामा लाइफस्टाइल’ की एक ग्रुप कंपनी है और इसमें 50-60 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है। मार्च 2018 में, दोनों कंपनियों का अनुमानित कारोबार करीब 614 करोड़ रुपये का है।

अपने उद्यमी यात्रा में सफल होने के बाद, उन्होंने वर्ष 2014-2015 में एंजेल निवेशक के रूप में एक यात्रा ऐप ‘गाईडदो टेक्नोलाॅजी प्राइवेट लिमिटेड’ में भी निवेश किया है। इसके अतिरिक्त उन्होंने एक क्लोजड ग्रुप चैट ऐप, द हॉउज़ में भी निवेश किया है उन्होंने करीब 250 करोड़ रूपये, वित्तीय सेवा ऋण के रूप में बाजार में भी दिए हैं। स्व-वित्तपोषित कंपनी सुुमाया समूह ने कारोबार में 110 करोड़ रुपये का निवेश किया है और ऐसा करना जारी है। पूरे समूह कपड़ों, वित्तपोषण और अन्य व्यवसायों के रूप में सुुमाया की शुद्ध संपत्ति करीब 650 करोड़ रुपये हैं।

ग्राहक आधार के बारे में बात करते हुए वे कहते हैं, “हम समस्त भारत में आपूर्ति करते हैं। सांस्कृतिक वस्त्रों के बाजार क्षेत्र में हमारे पास लगभग 65 प्रतिशत का हिस्सा है। सुयामा लाइफस्टाइल का बाजार आधार अब काफी बड़ा हो गया है और दुबई, ओमान और यूएस में विस्तार किया गया है। पूरे भारत में विस्तारित करने के अलावा अब कारोबारी कार्यालय दुबई, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में भी है। यह फैशन आधारित एक भारतीय कंपनी का पहला उदाहरण है जिसकी विदेशों में शाखाएं हैं।

मुंबई में 3,50,000 वर्ग फुट भूमि पर निर्मित सुमाया लाइफस्टाइल की एकमात्र विनिर्माण इकाई उच्चतम आधुनिक तकनीक युक्त इकाई है। यह 85 प्रतिशत स्वचालित है और यहीं से इसके वस्त्रों का निर्यात विदेशों में अपने कार्यालयों में किया जाता है।

परिधान व्यवसाय में महत्वपूर्ण सफलता के लिए पेरिस में, उशिक को गारमेंट उद्योग में सबसे छोटे सीईओ के रुप में उत्कृष्टता पुरस्कार के रूप में नामित किया गया है और जैन समुदाय में सबसे कम उम्र के अरबपतियों के लिए नामांकित किया गया है। वे जैन इंटरनेशनल आर्गेनाईजेशन (JIO) के ग्लोबल डायरेक्टर भी हैं।

सफलता के बारे में उनका एकमात्र मंत्र है, “कड़ी मेहनत करें और आपके कर्म आपको उसके बदले उचित फल देगा।”

इस व्यक्ति के प्रेरणादायक कहानी को साझा करें, जिसने व्यवसाय की बुनियादी बातें सीख कर दुनिया भर में उसे फैलाया है।

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