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18,000 किलो बम से भरे फाइटर विमान में आग लग गई और फिर पायलट ने जो किया वह अविश्वसनीय है

जब विपरीत परिस्थितियों का सामना हो जाए तो व्यक्ति सबसे पहले सब कुछ छोड़ कर सिर्फ अपनी जान बचाने में लग हो जाता है। बहुत ही कम लोग होते हैं जो मुश्किल परिस्थितियों मैं अपनी जान की परवाह किये बगैर दूसरों की मदद में जुट जाते हैं। यह कहानी भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर गौरव बिक्रम सिंह चौहान की है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी और हर चुनौती पर विजय प्राप्त की।

19 फरवरी 2013 में भारतीय वायु सेना अपनी शस्त्रों की शक्ति प्रदर्शन के एक शो द आयरन फिस्ट में व्यस्त थी।  गौरव अपने को-पायलट ऐ आर तमता के साथ राजस्थान के पोखरण में रात में आसमान से धरती पर हवाई हमले के लिए चुने गए थे। उनकी सवारी सुखोई SU-30MKI भारतीय वायु सेना के भरोसेमंद अग्रिम पंक्ति के फाइटर प्लेन में शामिल था, जिसमें 18,000 किलोग्राम विस्फोटक भरा हुआ था।

घटना की रात को, वे दोनों 6900 फ़ीट की तय की गई ऊंचाई पर मंडरा रहे थे। गौरव ने लक्ष्य को पहचान कर, हमले की रूपरेखा तैयार की और उसे मिशन कम्प्यूटर पर अपलोड कर दिया। बम को छोड़ने के लिए तमता ने ट्रिगर दबाया। लेकिन विस्फोट से आकाश को रोशनी से नहला देने के बजाय, वह सुखोई विमान स्वयं एक आग का गोला बन कर अचानक नीचे गिरने लगा। उसमे से एक बम खुद-ब-खुद राइट विंग में फट गया था। धातु के टुकड़े कॉकपिट की छत को दुर्घटनाग्रस्त कर गए और दोनों मजबूत चालकों के शरीरों पर जख्म दे गए।

सभी नियंत्रण उपकरण बेकार हो चुके थे। गौरव जानते थे कि केवल जेट से ईजेक्ट करते हुए बाहर निकल जाना ही एकमात्र उपाय बचा था। धातु के टुकड़े से चोट की वजह से चेहरे पर खून बह रहा था। उन्होंने एक सुपरह्यमन की तरह कॉकपिट की जलती हुई रेलिंग के खिलाफ धक्का देने का प्रयास किया और संभलकर इजेक्शन हैंडल के पास पहुंचे। परन्तु इजेक्शन कॉर्ड अटक गया था। उन्होंने तीन बार इजेक्शन कॉर्ड को खींचा परन्तु लाभ नहीं हुआ। वक्त बीत रहा था और कॉकपिट भट्टी बन चुका था। उन्होंने अंतिम बार कोशिश की और सफलता पूर्वक अपने को-पायलट के साथ बाहर छलांग लगा दी।

तमता को मामूली चोटें आयी थीं परन्तु गौरव की अपनी दृष्टि लगभग खोते-खोते बची। उनके किये गए उनके साहसिक कारनामे के कारण विंग कमांडर गौरव बिक्रम चौहान को वायु सेना मेडल से सम्मानित किया गया। गौरव और तमता इस दुर्घटना के एक साल बाद उड़ान के लिए पुनः लौट आये। कमांडर गौरव की पत्नी गौरव के वापस अपने काम पर लौटने पर कहती हैं, “once a fighter pilot, always a fighter pilot” अर्थात एक लड़ाकू पायलट हमेशा एक लड़ाकू पायलट की तरह ही रहता है। केनफ़ोलिओज़ की टीम कमांडर गौरव बिक्रम सिंह के अदम्य साहस और बहादुरी को सलाम करती है।

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